Wednesday, August 7, 2019

इरादा 
हो  ठान  गर , पक्का  कोई  इरादा।
दे बदल  फिर , वक़्त  ये  सारा।
भुला हालात -२ ,   वक़्त  फिर  कोई,  अपना  बदल।


बेवजहा,  ये  दलीलें  क्यों  ........ ?
उलझें  जाल , सवाल  क्यों। ......... ?


एक  तू हैं , और हजार  सवाल
अरे !  रहम  तो , तू जरा   खुद  पर कर। 
हो  जरा , खुद ग़र्ज - सा -२

हालात- ए  हर , मुस्कराहट  रह।
वक़्त  चाहें , बेवक़्त  सही।
कमी  को तराश , काबिल  तो बन।


जवाबी  मुस्कुटाहट  बता,  उसे भी  दे।
काबिल है  तू , काईल  नहीं।

जिन्दा  है  तू , अभी मरा  तो नहीं।
जिन्दा  है  तू , अभी मरा  तो नहीं।।







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