इरादा
हो ठान गर , पक्का कोई इरादा।दे बदल फिर , वक़्त ये सारा।
भुला हालात -२ , वक़्त फिर कोई, अपना बदल।
बेवजहा, ये दलीलें क्यों ........ ?
उलझें जाल , सवाल क्यों। ......... ?
एक तू हैं , और हजार सवाल
अरे ! रहम तो , तू जरा खुद पर कर।
हो जरा , खुद ग़र्ज - सा -२
हालात- ए हर , मुस्कराहट रह।
वक़्त चाहें , बेवक़्त सही।
कमी को तराश , काबिल तो बन।
जवाबी मुस्कुटाहट बता, उसे भी दे।
काबिल है तू , काईल नहीं।
जिन्दा है तू , अभी मरा तो नहीं।
जिन्दा है तू , अभी मरा तो नहीं।।