प्रकृति का फलसफा
विरह की तपती धूप में , झुलसी धरती ,जब अहा कई भरे
फिर क्या ...... ? आसमां भी बरस पड़ा , धरती की प्यास बुझा।
हो खुदी में गुम , फिर किसी की प्यास मिटा।
कहीं पुष्प खुले , कही हरियाली तो, किसी की तड़प , किसी का रहम
और किसी का , नया जन्म हुआ।।
No comments:
Post a Comment