Wednesday, July 31, 2019

प्रकृति  का फलसफा 

विरह  की  तपती धूप  में , झुलसी  धरती ,जब अहा  कई  भरे 
फिर क्या ...... ? आसमां  भी  बरस  पड़ा , धरती  की  प्यास  बुझा। 
हो  खुदी  में गुम , फिर  किसी  की प्यास मिटा। 
कहीं  पुष्प  खुले , कही  हरियाली तो,  किसी की तड़प , किसी का रहम 
और  किसी  का , नया जन्म  हुआ।।  


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