Wednesday, July 31, 2019

एक विचार 

ना  समझ  को , समझ  क्या ......... ?
अज्ञानी  को , ज्ञान  क्या। ....... ?

एक  विचार 

हमें  अब  , सच  और  झूठ  का 
 मालूम  पता  हो गया। 
जहाँ  आँख , दिखाए  झूठ  
 कहीं   उठती  आवाज़  में , पहचान - ए  पता हो गया।।

प्रकृति  का फलसफा 

विरह  की  तपती धूप  में , झुलसी  धरती ,जब अहा  कई  भरे 
फिर क्या ...... ? आसमां  भी  बरस  पड़ा , धरती  की  प्यास  बुझा। 
हो  खुदी  में गुम , फिर  किसी  की प्यास मिटा। 
कहीं  पुष्प  खुले , कही  हरियाली तो,  किसी की तड़प , किसी का रहम 
और  किसी  का , नया जन्म  हुआ।।  


स्वच्छता अभियान 

काम मे क्या चोरी कैसी 
रहा बंद किताबी जुमला 
करने अमल जब आई बारी 
सबने बस पीट दिखाई 
मारा सबने अपने मुँह पे  ढाता 
भाग गंदगी से था पीछा छूता 
घर का गंदा बाहर फेंका 
था अपने ही मुँह पे थूका, देश के हो सम्मान को फूका 
घर एक मंदिर, साफ़ किया तो मान पुजारी 
उसने किया, पड़ा मान पे भारी 
आई अब सम्मान की बारी, दी धुँधकारे बारी -बारी  
मैने देखा, जब गौर से सोचा 
सबने फेंका, उसने बीना 
साफ़ किया हर कोना -कोना 
कर मेहनत दीन -दुपहरी ,कचरा पट्टी रोज उठाता 
स्वच्छता का भार सभाले , खड़ा  तू  अपना सीना  ताने
बन  सिपाही  खासे प्रण  लेता ,करी  भूल  को  साफ  कर  जाता
बिन  सफ़ाई  स्वास्थ्य  जो बिगाड़ा ,याद आया  फिर अगला -पिछला
बिन\ डिग्री  के  डॉक्टरी  पाई , ये सही  पर देर  अकाल में आई
बुरी ये  अपनी सोच  मिटाए , पड़ा  गंदगी  पर  अंकुश  मिटाए
स्वच्छ्ता  की ओर ,मिलकर  कदम  बढ़ाए
कोई ना  छोटा  न बड़ा  है ,पहले  देश  का मान बड़ा  है
देश को अपने चमन  बनाएं ,भारत  शान  को सफल  बनाएं 

Tuesday, July 30, 2019

उठती  आवाज 

कहीं  बहते  आँसू , कहीं  भूख़  ने  मारा  कोई  इंसान  है 
कोई  सोता  मकान में ,किसी  का  झोंपड़ा  खुलेआम  है 
गरीब  की  आँख में ,पलते  सपने  भी  गरीब  हैं  
चलते  कहीं  दौलती ,हक़ीकत  हुए  ख्याब  हैं 

मांगी  दुआओं  से ,पेट  कभी  भरता  नहीं 
बैठे  जब , अमीरी  के  ठेकेदार  हैं 
सपने  झूठे  दिखा ,तसल्लियाँ  हजार  दी 
तसल्लियों  से  भी, पेट  भरता नहीं
 
जिंदगी -ए  जरूरत  पूरी  होती  नहीं 
फटे  हाल , कुचले  जहां  सारे  गरीबी  जज़्बात  हैं 
कैसा  ये  इंसाफ  है , कैसा  ये  इंसाफ  है 

गरीबी  की , उठी  अब  आवाज  है 
तसल्लियाँ  अब, बचा  कर  अपने रखो 
काम  तुम्हारे  अब ,जो  आएंगी
 
नील  में  कमल  खिलता  नहीं ,कीचड़  में  ही  उसका  वास  है 
काला  धन  खत्म ,काम  अब  सिक्के  ही  आएंगे 
कह  दो ,उन  ठेकेदारों  से , गरीब  के  दिन  भी  आएंगे  गरीब  के  दिन  आएंगे