उधार की ज़िन्दगी
थी वो कोख भी उधार की
ये ज़िन्दगी उधार की
मिला प्यार भी उधार का
घर आँगन वो भी था उधार का
पुकारा गया लक्ष्मी कहकर हमें
डूबी थी कर्ज में कर दिया कंगाल हमे
डोली जब उठी
मालूम चला किराये दार थे हम
बताया घर के मालिक ने हमें
थी वो आन भी शर्त की
वो शान भी शर्त की
खरा उतरना मजबूर थे हम
थी ज़िन्दगी उधार की
ख़तम जो ज़िन्दगी का एक कारवां
निकला प्यार से डोली में सजा कर
थी प्यार से सुनाई मौत की सजा हमें
दे कीमत ख़रीदा जो दूसरा घर आँगन यहाँ
न रहा अपनी साँसों पे कोई हक़ यहाँ
कीमत दे कर रहे थे किसी की नौकरी यहाँ
मत पूछो कैसी चुका रहे थे कीमत यहाँ
महँगा पड़ा इतना लुटा अपना सब कुछ
अदा न कर सके महँगी कीमत यहाँ
थे हाथ अपने दूसरे के कंगना यहाँ
थी मांग भी अपनी दूसरे के नाम
पर सजाई यहाँ
माँग रहे थे मालिक की लम्बी
उम्र की दुआ यहाँ
थी ज़िन्दगी उधार की
न नकदी यहाँ
आया वो वक़्त भी सजाया गया
प्यार से रुला कर अर्थी पे यहाँ
थी ये आखिरी बिदाई ज़िन्दगी यहाँ
कैद थी उधार की ज़िन्दगी यहाँ
हुए अलबिदा जब मिली मौत यहाँ
तौबा की मिले न अब उधार की
ज़िन्दगी यहाँ
महँगी बड़ी पड़ी उधार की ज़िन्दगी यहाँ
उधार की ज़िन्दगी यहाँ ||