Monday, December 24, 2018


नीरजा  भनोत 

माँगा था तूने दुआओ मे 
लिपट ममता के आँचल मे 
बन आई मैं मन्नत तेरी 
जीने तूने फक्र से दिया 
साथ तूने हर कदम मेरा दिया 
हौंसला भी मेरा बढाया 
मुश्किलों मे भी जीना तूने सिखाया 
बन माँ स्वार्थ का पाठ पढ़ाया 
कभी इंसानीयत के नाम का शबक तूने सिखाया 
थे वाकिफ़ बस तेरी नजर से 
क्या फिर मुत्तफिक़ हुए बेनजर से 
बिना शर्त अब तक जी जिंदगी 
हुए मजबूर जी शर्त की जिन्दगी 
कहा था ना गलत करना कभी 
ना गलत सहना कभी 
गलती से भी गलत करना ना लाड़ मेरे 
हुई ना मंजूर शर्त की जिंदगी 
तोड़ दी मैंने जंजीरे शर्त की 
ठान लिया मैंने ये 
पहुँचे शैतान परेशां करने मुझे 
कर सामना दिया हो शैतान को नाकाम  ऐसे 
मौत की आँखों मे आँखे डाल दी हो जैसे 
गई जब निकल मेरी जान 
था सकूँ बच गई कई जान 
शहादत-ऐ-कुर्बान  
लो हो गई मैं आज भारत की शान 
बनी इतिहासी अमर कहानी मेरी 
नाम था नीरजा भनोत 
यह है पहचान मेरी 


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