नीरजा भनोत
माँगा था तूने दुआओ मे
लिपट ममता के आँचल मे
बन आई मैं मन्नत तेरी
जीने तूने फक्र से दिया
साथ तूने हर कदम मेरा दिया
हौंसला भी मेरा बढाया
मुश्किलों मे भी जीना तूने सिखाया
बन माँ स्वार्थ का पाठ पढ़ाया
कभी इंसानीयत के नाम का शबक तूने सिखाया
थे वाकिफ़ बस तेरी नजर से
क्या फिर मुत्तफिक़ हुए बेनजर से
बिना शर्त अब तक जी जिंदगी
हुए मजबूर जी शर्त की जिन्दगी
कहा था ना गलत करना कभी
ना गलत सहना कभी
गलती से भी गलत करना ना लाड़ मेरे
हुई ना मंजूर शर्त की जिंदगी
तोड़ दी मैंने जंजीरे शर्त की
ठान लिया मैंने ये
पहुँचे शैतान परेशां करने मुझे
कर सामना दिया हो शैतान को नाकाम ऐसे
मौत की आँखों मे आँखे डाल दी हो जैसे
गई जब निकल मेरी जान
था सकूँ बच गई कई जान
शहादत-ऐ-कुर्बान
लो हो गई मैं आज भारत की शान
बनी इतिहासी अमर कहानी मेरी
नाम था नीरजा भनोत
यह है पहचान मेरी
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