Monday, December 24, 2018


ईनामी ठोंकर 


बाजार क्या खूब था 
नुमाईश भी खूब थी 
बिठाया गया प्यार से हमें 
लगी बोली ईनाम थी 
फैसला ही नासूर था
 खुदी थी बेजुवा बनी 
लगी बोली ईनाम थी 
चर्चा खास नूर था 
करना रंगे दीदार था 
शामिले न कद बददुआ थी 
हमारा ईनाम तमाम दुदकार था 
क्या नसीब अपना खराब था 
या कदरदान की नजर खराब थी 
बाजार क्या खूब था 
नुमाईश भी बेकदर थी 
कहुँ क्या तमाम जमाने 
ये रश्म बेकदर खराब थी 

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