ईनामी ठोंकर
बाजार क्या खूब था
नुमाईश भी खूब थी
बिठाया गया प्यार से हमें
लगी बोली ईनाम थी
फैसला ही नासूर था
खुदी थी बेजुवा बनी
लगी बोली ईनाम थी
चर्चा खास नूर था
करना रंगे दीदार था
शामिले न कद बददुआ थी
हमारा ईनाम तमाम दुदकार था
क्या नसीब अपना खराब था
या कदरदान की नजर खराब थी
बाजार क्या खूब था
नुमाईश भी बेकदर थी
कहुँ क्या तमाम जमाने
ये रश्म बेकदर खराब थी
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