Saturday, December 22, 2018

उधार की ज़िन्दगी 

थी वो कोख भी उधार की 
ये ज़िन्दगी उधार की 
मिला प्यार भी उधार का 
घर आँगन वो भी था उधार का 
पुकारा गया लक्ष्मी कहकर हमें 
डूबी थी कर्ज में कर दिया कंगाल हमे 
डोली जब उठी 
मालूम चला किराये दार थे हम 
बताया घर के मालिक ने हमें 
थी वो आन भी शर्त की 
वो शान भी शर्त की 
खरा उतरना मजबूर थे हम 
थी ज़िन्दगी उधार की 
ख़तम जो ज़िन्दगी का एक कारवां 
निकला प्यार से डोली में सजा कर 
थी प्यार से सुनाई मौत की सजा हमें 
दे कीमत ख़रीदा  जो दूसरा घर आँगन यहाँ 
न रहा अपनी साँसों पे कोई हक़ यहाँ 
कीमत दे कर रहे थे किसी की नौकरी यहाँ 
मत पूछो कैसी चुका रहे थे कीमत यहाँ 
महँगा पड़ा इतना लुटा अपना सब कुछ 
अदा न कर सके महँगी कीमत यहाँ 
थे हाथ अपने दूसरे के कंगना यहाँ 
थी मांग भी अपनी दूसरे के नाम 
पर सजाई यहाँ 
माँग रहे थे मालिक की लम्बी 
उम्र की दुआ यहाँ 
थी ज़िन्दगी उधार की 
न नकदी यहाँ 
आया वो वक़्त भी सजाया गया 
प्यार से रुला कर अर्थी पे यहाँ 
थी ये आखिरी बिदाई ज़िन्दगी यहाँ 
कैद थी उधार की ज़िन्दगी यहाँ 
हुए अलबिदा  जब मिली मौत यहाँ 
तौबा की मिले न अब उधार की 
ज़िन्दगी यहाँ 
महँगी बड़ी पड़ी उधार की ज़िन्दगी यहाँ 
उधार की ज़िन्दगी यहाँ || 

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