माँ
नाज़ किया खुदी पर
फिकराना जी जिन्दगी
ठहरी जब राह में ,
होश मिली ज़िन्दगी
ठिठोरी खूब बनाई
फिर भी साधी रही
चुप्पी-सी सादगी
उफ़ ! तक न भरी
समझती रही मुझे
मेरी माँ की गयी मौसकी
दर्द में काम न आयी दवा कोई
तब याद मुझे गोद तेरी क्यों आयी
सहलाकर प्यार से , दर्द सब मेरे लिए
पिलाकर प्यार भरी ममता की दवाई
रात रात भर जगी
और रात भर आँख मुँद मैं सोती रही
मैं स्वार्था में सदा डूबी रही
तु भला स्वार्थ बिना नौकरी मेरी करती रही
माँगी न तूने इसकी कीमत कोई
बस हाँ बस...... मैं जान गई
तू कोई और नहीं तू मेरी माँ ,
जननी मेरी माँ |
तु भला स्वार्थ बिना नौकरी मेरी करती रही
माँगी न तूने इसकी कीमत कोई
बस हाँ बस...... मैं जान गई
तू कोई और नहीं तू मेरी माँ ,
जननी मेरी माँ |
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