Friday, December 21, 2018

चिड़िया तेरी 

जानी अनजानी कहानी तेरी
शुरु आँगन ,खत्म आँगन रही
आँगन में सदा कूदी रही
सूना आँगन ,बगीया बनाया
खाली मकान तेरा घर मैंने बनाया
ची -ची की आवाज लगाई
चिड़िया मैं तेरी कहलाई
नजर जो तेरी छूटी
नजर मे दुश्मन की चुभी
दे दाना प्यार से आँगन में बुलाया
शिकारी ने प्यार का,फिर जाल बिछाया
आँगन से तेरी चुप से चुराया
आवाज न कोई मेरी सुनी
थी आवाज भी मेरी दबी
बंद पिजरे में रोतीं रही
आश की आँखों में रोतीं ही रही
टूटे पंख मैंने फड़फड़ाये
पर वो मेरे कोई काम न आये
गूजी ना आँगन में अब आवाज कोई
तेरी चिड़िया अब जो कैद हुई
जानी -अनजानी कहानी कही
शुरी आँगन खत्म आँगन रही 

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