टुटा पेड़
पानी बरसा हमलाई लाया
खड़ा साल से मैं जो भीगा
गीली डाली पत्ती मुरझाई
हवा ने तीखा बान चलाया
घायल पत्तों ने शोर मचाया
अपनी मानी सबसे करवाई
चोट लगी पत्तों को नचवाया
बूँदी पत्ते भारी अपना बोझ उठाया
बिना सभा ताली पिटबाई
झूमी डाली सब बिखर गई
तड़पे पत्ते टूटी डाली
सीना पेड़ का चीर दिया
खत्म हुई अब कही कहानी
सीमित होता बरसा का पानी
बरसा का वार सहन कर जाता
अगली साल खडा मैं रहा जाता
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