Monday, December 24, 2018

टुटा पेड़

पानी बरसा हमलाई लाया 
खड़ा साल से मैं जो भीगा 
गीली डाली पत्ती मुरझाई 
हवा ने तीखा बान चलाया 
घायल पत्तों ने शोर मचाया 
अपनी मानी सबसे करवाई 
चोट लगी पत्तों को नचवाया 
बूँदी पत्ते भारी अपना बोझ उठाया 
बिना सभा ताली पिटबाई 
झूमी डाली सब बिखर गई 
तड़पे पत्ते टूटी डाली 
सीना पेड़ का चीर दिया 
खत्म हुई अब कही कहानी 
सीमित होता बरसा का पानी 
बरसा का वार सहन कर जाता 
अगली साल खडा मैं रहा जाता 

















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