Thursday, December 20, 2018

फिराती गम 

नाजो में पले थे 
दूर कितने गम थे 
देख तक़दीर , गम की नजर में चुभे थे 
हमलाई गम फिराक थे 
दूर कितने गम थे 
काले घोड़े पे सवार गम की चादर ओढे 
वो ले गया बिठा के 
कहता रहा देख तक़दीर 
अब गम ही गम थे 
आह ! कई दी 
गम अब तो छोड़ फिरात 
ये लब्ज भी अब अनसुने थे 
टूटी अब आशा 
लड़खड़ाए अब जो कदम 
मूँद आँख याद जो किया 
नाज़ो में पले थे 
दूर कितने गम थे
देख तक़दीर गम कितने कम थे 

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