ख्वाब तेरा
पलको की दहलीज पे
ख्वाब ने दस्तक कई दिए
उफ़ ! सोई थी आँख
बेनजर ख्वाब किये
जिद पे ख्वाब भी अड़ा
बन हमसफ़र ख्वाब तेरा बाहर खड़ा
न समझ पहरेदार था
पहचान था
पहचान न मेरी कर सकी
ख्वाब तेरा बाहर खड़ा
काली सुनी डिबिया
खाली बन्द पड़ी
एक पहर खुली
फिर मूँद पड़ी
बाहर तेरा ख्वाब खड़ा
बैठ , ताक आँख सुनी समाऊ
एक पल बंद
खुली उम्मीद पर लगाउ
तू ख्वाब में जगे ख्वाब में सोये
ख़याली पालकी सपने सजाऊ
कर दहलीज पार ,फिर ख्वाबी बहार लाउ
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