Monday, January 7, 2019

चीख़ 

नन्हें -नन्हें हाथ मेरे 
मुठ्ठी मे अपनी तकदीर लिए 
आँखो मे नन्हें ख्याब पले 
मासुमियत को अपनी साथ लिए 
चले बेपाक दहलीज को अपनी पार किए 
ताक़ मे बैठा भेड़िया कई शिकार किए 
मन मे गंदे कई विचार लिए 
फैला गंध मेरा शिकार किए 
चीख़ ना निकली मुँह पे हाथ लिए 
बुरे पल ये दरिन्दगी के साथ मेरे 
चीखी न  सुनी पुकार मेरी 
तड़पी रोई पर ना देखे आँसू मेरे 
रूह तक घबरा गई 
आस भी खत्म हुई
साँस भी मेरी अटक गई 
अब जान मेरी निकल गई 
पल मे मार दिया होता 
ना मरते ऐसे हाल मेरे 
कसूर न मेरा कोई रहा 
बढ़ी कसूर तोल की 
कसूरवार सिर्फ हम रहे 
माँ जिंदगी ने किया क्यों परेशान मुझे 
दुआ कर मिले न जिंदगी मुझे 
करो ना कहानी यो ही दफ़न मेरी 
खत्म करो दरिन्दगी जोड़ू हाथ करुँ विनती 
दोहरे न घिनौना बेटी का ये इतिहास कहीं 

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