Thursday, December 20, 2018

चिरागी सभा 

सभा चिरागी जुडी थी 
लगी  जली होड़ थी 
चराग तो हजारो थे 
जलते जिन्हे रहना था 
इम्तिहान अपना जोर था 
देखना जोर किसमें था 
चराग तो हज़ारो थे 
जलते जिन्हे रहना था 
सामना भी कुछ खास था 
बुझना या जलना बस बाकी था 
जलना मकाम था जिसका 
वो खुदी मकाम था 
बाकी सब बुझ गये 
बस ही जलता रहा 
चराग तो हज़ारो थे ,
जलते जिन्हे रहना था 
सभा चिरागी जुड़ी थी 
लगी जली होड़ थी 
जिन्दा थे तो जिक्र रोज था 
मर गए तो याद किया 
कर याद इंसानियत न दिखाओ 
मर गए कही याद न दिलाओ 
कर दफन ,जिक्र मेरा जुबा पे न लाओ 
लगा मरहमी दवा 
चोट मेरी ,घाव न लगाओ 
मर गए कही ये याद न दिलाओ 
भूली याद जो मेरी याद न दिलाओ 

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